धामी सरकार के चार साल बेमिसाल : निवेश, रोजगार और सुरक्षा, हर मोर्चे पर ऐतिहासिक उपलब्धियां

धामी सरकार के चार साल बेमिसाल : निवेश, रोजगार और सुरक्षा, हर मोर्चे पर ऐतिहासिक उपलब्धियां

देहरादून।
उत्तराखंड में मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के चार वर्ष सफलतापूर्वक पूर्ण कर लिए हैं।
यह अवधि राज्य के लिए अभूतपूर्व विकास, सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याणकारी निर्णयों की रही है।
राज्य सरकार ने जहां एक ओर शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को पाँच गुना तक बढ़ाया है, वहीं सेना के परमवीर चक्र से लेकर “Mention in Dispatches” तक सभी वीरता पुरस्कारों की राशि में ऐतिहासिक वृद्धि की है।
परमवीर चक्र से सम्मानित सैनिकों को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया गया है।
इसके साथ ही, शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाने हेतु प्रदेश में “भव्य सैन्य धाम” का निर्माण भी किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड आज विकास और समृद्धि के नए आयाम स्थापित कर रहा है।
राज्य में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, रेल एवं हवाई कनेक्टिविटी सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हो रहा है, वहीं विभिन्न नीतियों और योजनाओं के माध्यम से सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जा रहा है।
बीते चार वर्षों में उत्तराखंड ने अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं।
पहली बार राज्य जी-20 बैठकों का साक्षी बना।
पहली बार राष्ट्रीय खेलों का सफल आयोजन हुआ, जिसमें राज्य ने 100 से अधिक पदक अर्जित कर सातवां स्थान प्राप्त किया।
पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु शीतकालीन यात्रा की शुरुआत की गई।
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट के माध्यम से 3.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते हुए, जिनमें से लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं धरातल पर उतर चुकी हैं।
राज्य की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आर्थिकी में डेढ़ गुना से अधिक वृद्धि हुई।
जीएसडीपी में 7.23% की बढ़ोतरी हुई।
प्रति व्यक्ति आय में 41% की वृद्धि हुई।
राज्य बजट 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक
औद्योगिक और उद्यमशीलता के क्षेत्र में भी राज्य ने नई ऊंचाइयां प्राप्त की हैं।
20,000 से अधिक नए उद्योग स्थापित हुए।
स्टार्टअप की संख्या 700 से बढ़कर 1750 से अधिक हुई।
हेलिपोर्ट 2 से बढ़कर 12 और हेलिपैड 60 से बढ़कर 118 हुए।
बिजली उत्पादन में तीन गुना वृद्धि हुई।
महिला सशक्तिकरण के तहत 2.65 लाख से अधिक महिलाएं “लखपति दीदी” बनी हैं।
पर्यटन क्षेत्र में होटलों की संख्या में 25% और होमस्टे में 50% से अधिक वृद्धि हुई है।
रिवर्स पलायन में 44% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
राज्य को विभिन्न राष्ट्रीय स्तर के सूचकांकों और पुरस्कारों में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त हुआ है।
नीति आयोग के सतत विकास लक्ष्य (SDG) इंडेक्स में प्रथम स्थान
सार्वजनिक वित्तीय प्रदर्शन सूचकांक में विशेष राज्यों में द्वितीय स्थान
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में “Achievers” श्रेणी
स्टार्टअप रैंकिंग में “Leaders” श्रेणी
इंडिया इनोवेशन इंडेक्स में हिमालयी राज्यों में दूसरा स्थान
लगातार चार वर्षों से “मोस्ट फिल्म फ्रेंडली स्टेट”
“बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ एविएशन इकोसिस्टम” का राष्ट्रीय सम्मान
खनन सुधारों के लिए राज्य को “राज्य खनन तत्परता सूचकांक” में दूसरा स्थान प्राप्त होने के साथ 200 करोड़ रुपये का पुरस्कार भी प्राप्त हुआ।
आबकारी और खनन से प्राप्त राजस्व में भी कई गुना वृद्धि हुई।
युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 30,000 से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई।
100 से अधिक नकल माफिया को जेल भेजा गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए सरकार ने बड़े से बड़े अधिकारियों पर भी सख्त कार्रवाई की है। पूर्ववर्ती सरकारों के दौरान हुए घोटालों की प्रवृत्ति पर प्रभावी रोक लगाई गई।
सांस्कृतिक और सामाजिक संरक्षण के क्षेत्र में भी ऐतिहासिक कदम उठाए गए।
समान नागरिक संहिता लागू कर सामाजिक न्याय सुनिश्चित किया गया।
सख्त धर्मांतरण एवं दंगा विरोधी कानून लागू
अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई की गई।
सख्त भू कानून लागू कर
मदरसा बोर्ड समाप्त कर सभी मदरसों को सरकारी बोर्ड के अधीन लाया गया।
“ऑपरेशन कालनेमी” एवं सत्यापन अभियानों के माध्यम से घुसपैठियों के खिलाफ व्यापक कार्रवाई की जा रही है।
बनभूलपुरा में हुई कार्रवाई ने कानून-व्यवस्था के प्रति सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया।
इन चार वर्षों में उत्तराखंड ने विकास, सुशासन और जनविश्वास के नए मानक स्थापित किए हैं।
धामी सरकार का “विकल्प रहित संकल्प” है कि आने वाले वर्षों में राज्य को देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित करते हुए राज्य में समग्र विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और जनकल्याण की दिशा में निरंतर कार्य किया जाएगा।



