गीता धामी ने कहा कि कार्यक्रम से माध्यम से हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं, बुनाई, रिंगाल के उत्पाद के संरक्षण को जीवित रखने में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है

गीता धामी ने कहा कि कार्यक्रम से माध्यम से हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं, बुनाई, रिंगाल के उत्पाद के संरक्षण को जीवित रखने में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है

सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा परेड ग्राउंड, देहरादून में आयोजित 4 दिवसीय उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 के दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।
पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने सेवा संकल्प फाउंडेशन द्वारा समाज हित के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन समाज के कमजोर वर्गों के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा फाउंडेशन की विभिन्न गतिविधियों जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण में योगदान को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और युवाओं को भी सामाजिक कार्यों में सक्रिय होने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्होंने कहा सेवा संकल्प फाउंडेशन स्थानीय उत्पादों को एक नया बाजार दे रहा है और उत्तराखंड को आत्मनिर्भर बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने सभी का उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में स्वागत करते हुए कहा कि देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं, लोक आस्थाओं, लोकगीतों और लोक उत्सवों से सुसज्जित इस भव्य उत्तरायणी कौथिक महोत्सव का आयोजन हो रहा है। उन्होंने कहा उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति अपने आप में विशिष्ट है। हमारे गीत-संगीत में हमारी संस्कृति की आत्मा बसती है।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि बेड़ा गीत, मांगल गीत चौती गीत सहित अनेकों प्रकार के पारंपरिक गीत ढोल, दमाऊ, ढोलकी, भंकोरा और रणसिंहा जैसे वाद्य यंत्रों आदि की धुनों पर गाए और बजाए जाते हैं। हमारे संगीत में पहाड़ों के कठिन जीवन सहित उसके सौंदर्य की झलक साफ देखी जा सकती है। हमारे पहाड़ी व्यंजन और पारंपरिक खान-पान भी हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा हैं। मडुए की रोटी, झंगोरे की खीर, भट्ट की चुड़कानी, गहत की दाल स्वास्थ्य और प्रकृति-अनुकूल जीवनशैली का संदेश भी देते हैं।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि कार्यक्रम से माध्यम से हस्तशिल्प और पारंपरिक कलाओं, बुनाई, रिंगाल के उत्पाद के संरक्षण को जीवित रखने में हमारी मातृशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा महोत्सव में महिलाएँ अपने कौशल और परिश्रम द्वारा ऐसे उत्कृष्ट उत्पाद तैयार कर रही हैं, जो स्थानीय बाजारों में ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तक में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहे हैं।
श्रीमती गीता धामी ने कहा कि संस्था द्वारा 172 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। जिसमें से 100 से अधिक निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही विभिन्न क्षेत्रों से आए कास्तकारों, शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों को भी अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन के माध्यम से सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित करने के साथ-साथ प्रकृति के संरक्षण, स्थानीय कृषि और पारंपरिक उत्पादों के संवर्धन की दिशा में भी निरंतर कार्य कर रहे हैं।
श्रीमती गीता धामी ने सभी से आग्रह करते हुए कहा कि हम सभी अपनी प्राकृतिक संपदा, समृद्ध संस्कृति और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए अपने-अपने स्तर पर अवश्य प्रयास करें। हम अपने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और स्वदेशी वस्तुओं का अधिक से अधिक उपयोग कर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में सहभागी बनना है।
*आकर्षण का केंद्र बनी ऐपण प्रतियोगिता*
लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उत्तरायणी कौथिक में ऐपण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने लकड़ी के तख्तों पर लाल बैकग्राउंड के ऊपर सफेद रंग से पारंपरिक ऐपण कला का सुंदर प्रदर्शन किया, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता में विशेष रूप से बालिकाओं एवं महिलाओं की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। पारंपरिक लोक कला को सहेजने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह प्रतियोगिता पूरे कार्यक्रम के दौरान आकर्षण का केंद्र बनी रही।
*नशा मुक्ति का दिया संदेश, विद्यार्थियों ने निकाली रैली…..*
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव के दौरान विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ नशा मुक्ति का संदेश भी दिया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने जागरूकता रैली निकालकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी और समाज को नशामुक्त बनाने का आह्वान किया। रैली के माध्यम से जन-जन को जागरूक करने का प्रयास किया गया, जिसमें लोगों ने भी उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।
*श्रीमती गीता धामी ने महोत्सव में विभिन्न स्टालों का किया निरीक्षण*
सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी श्रीमती गीता धामी ने उत्तरायणी कौथिक महोत्सव में विभिन्न जिलों से आए स्टालों का निरीक्षण किया और स्थानीय उत्पादों की खरीददारी की। उन्होंने काश्तकारों से उनका कुशलक्षेम पूछा और उनके उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी ली। श्रीमती धामी ने उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि हमें अपने स्थानीय उत्पादों और काश्तकारों का समर्थन करना चाहिए ताकि हमारी संस्कृति और परंपराएं मजबूत बनें और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिले।
*गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के लोकगीतों ने जीता जनता का दिल…….*
उत्तरायणी कौथिक महोत्सव 2026 में देवभूमि उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं की मनमोहक झलक देखने को मिली। उत्तराखण्ड के लोक कलाकारों और गायकों ने अपनी प्रस्तुतियों से उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। शाम को आयोजित स्टार नाइट में उत्तराखण्ड के प्रसिद्ध गायक गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी, लोक गायक पद्मश्री श्रीमती बसंती बिष्ट, श्री गोविंद , श्रीमती खुशी जोशी , श्री ललित गित्यार के लोकगीतों ने हर किसी के दिल को छू लिया।
इसके साथ ही महोत्सव के दूसरे दिन मां बाराही सांस्कृतिक दल, बुरांस कला केन्द्र द्वारा गोर्खाली ग्रुप की प्रस्तुति, ब्रह्मकमल सांस्कृक्तिक दल गढ़वाल की प्रस्तुति, हरयाली पर आधारित नुक्कड़ नाटक, नवोदय पर्वतीय कला केन्द्र दल की प्रस्तुति, एस.जी.आर.आर स्कूल के बच्चों द्वारा वंदना एवं अन्य कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।
आज महोत्सव में मुख्य सचिव श्री आनंद बर्द्धन, श्री विनय रुहेला, श्रीमती लीलावती राणा, श्री गीताराम गौड़, श्रीमती रश्मि बर्द्धन, श्रीमती विदुषी, श्रीमती नेहा, एवं अन्य गणमान्य मौजूद रहे।



