मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हित में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हित में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने आज जनपद पिथौरागढ़ के भ्रमण कार्यक्रम के दौरान लक्ष्मण सिंह महर कैंपस में आयोजित भव्य ‘कैलाश उत्सव-2026’ का दीप प्रज्वलित कर विधिवत शुभारंभ किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की सहभागिता रही। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर जनपद के समग्र विकास हेतु कुल ₹16520.56 लाख लागत की 45 विभिन्न विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास कर जनपदवासियों को महत्वपूर्ण सौगात दी।
अपने संबोधन की शुरुआत मुख्यमंत्री ने “भारत माता की जय”, “हर-हर महादेव” तथा “गुरना मईया की जय” के उद्घोष के साथ की। उन्होंने कहा कि ‘कैलाश उत्सव’ केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं, आध्यात्मिक चेतना और सीमांत क्षेत्र की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान भोलेनाथ के पावन धाम कैलाश के नाम से जुड़ा यह आयोजन संस्कृति, अध्यात्म और आधुनिक सोच का सुंदर संगम प्रस्तुत करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें अपनी जन्मभूमि और पिथौरागढ़ की युवा शक्ति के बीच आने पर विशेष आत्मीयता का अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ की मिट्टी, संस्कार और यहां का वातावरण उनके जीवन की प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने छात्रसंघ एवं आयोजन समिति की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन युवाओं को अपनी प्रतिभा और रचनात्मकता प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ जनपद अपनी प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विविधता के कारण देश-दुनिया में विशेष पहचान रखता है। उन्होंने कहा कि आदि कैलाश एवं ओम पर्वत जैसे पवित्र स्थलों के कारण यहां धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य सरकार द्वारा सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, विद्युत एवं पर्यटन अधोसंरचना को सुदृढ़ करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है, जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज’ विजन के अनुरूप सीमांत गांवों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सीमांत क्षेत्रों को सशक्त एवं आत्मनिर्भर बनाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क संपर्क, डिजिटल कनेक्टिविटी तथा पर्यटन विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, नवाचार और रोजगार के क्षेत्र में उत्तराखंड को अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत एआई, मशीन लर्निंग और बिग डाटा जैसे आधुनिक विषयों को बढ़ावा दिया जा रहा है। राज्य में साइंस सिटी, एस्ट्रो पार्क तथा मॉडल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है। साथ ही महिला छात्रावास, आईटी लैब एवं परीक्षा भवनों के निर्माण पर भी कार्य किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिथौरागढ़ केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश का भी महत्वपूर्ण सीमांत जनपद है। सीमांत क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है तथा सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और पर्यटन के क्षेत्र में तेजी से विकास कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि पिथौरागढ़ में लगभग ₹750 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज भविष्य में पूरे सीमांत क्षेत्र के लिए स्वास्थ्य सुविधाओं का बड़ा केंद्र बनेगा। इससे जनपदवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा राज्य के मेडिकल छात्र-छात्राओं को उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा का अवसर प्राप्त होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने युवाओं के हित में देश का सबसे सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले साढ़े चार वर्षों में 32 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने सहित अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि राज्य में संचालित सभी मदरसों को एक जुलाई से पूर्व उत्तराखंड शिक्षा विभाग के निर्धारित पाठ्यक्रम एवं मानकों को अपनाना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। निर्धारित मानकों का पालन नहीं करने वाले मदरसों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं के हित में कई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय में रोजगारपरक पाठ्यक्रम प्रारंभ करने हेतु आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। परिसर में स्थित जर्जर भू-विज्ञान भवन का ध्वस्तीकरण कराया जाएगा तथा आवश्यकता के अनुरूप नए शैक्षणिक भवन एवं ऑडिटोरियम का निर्माण किया जाएगा। साथ ही खेल मैदानों के विस्तारीकरण की दिशा में भी कार्य किया जाएगा।
इस दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों से संबंधित कुल ₹16520.56 लाख लागत की 45 विकास योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया, जिनमें सड़क निर्माण, पेयजल योजनाएं, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, शैक्षिक अधोसंरचना विकास तथा अन्य जनकल्याणकारी परियोजनाएं शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन योजनाओं के पूर्ण होने से सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी तथा क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी।
कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्होंने पारंपरिक लोक संस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। मुख्यमंत्री ने कलाकारों की प्रस्तुति की सराहना करते हुए कहा कि लोक संस्कृति हमारी पहचान है और इसे संरक्षित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री , अध्यक्ष जिला पंचायत जितेंद्र प्रसाद, जिलाध्यक्ष भाजपा गिरीश जोशी, मेयर नगर निगम कल्पना देवलाल, जिलाधिकारी आशीष कुमार भटगांई, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रहलाद कोंडे, पूर्व छात्र संघ महासचिव गहराज पाण्डेय, जनप्रतिनिधिगण, शासन-प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा भारी संख्या में क्षेत्रीय जनता उपस्थित रही।



