उत्तराखंड

यदि जनता से जुड़ाव होता तो देहरादून में रुककर संवाद करते राहुल : महेंद्र भट्ट

यदि जनता से जुड़ाव होता तो देहरादून में रुककर संवाद करते राहुल : महेंद्र भट्ट

देहरादून 4 मई। भाजपा ने कटाक्ष किया कि मौसम खराबी से दौरा रद्द होना मजबूरी लेकिन जहां मौसम सही वहां लोगों से बात करने क्यों नहीं रुके राहुल ? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद श्री महेंद्र भट्ट ने व्यंग कसा कि शुक्र है, चुनाव में अभी समय है अन्यथा हेलीकॉप्टर नही उड़ने का दोष भी भाजपा पर मढ़ दिया जाता। वो बात और है कि पद आकांक्षी कांग्रेसियों के अलावा किसी को भी राहुल का इंतजार नहीं था। वहीं कांग्रेसी युवराज की प्रतिक्रिया भी यही बताती है कि उन्हें आम लोगों से नहीं मिलने से अधिक दुख मुहम्मद के जिम नहीं जाने का हुआ।

 

मीडिया द्वारा प्रतिक्रिया पूछे जाने पर उन्होंने कहा, मौसम को देखते राहुल गांधी ने अल्मोड़ा और पौड़ी का दौरा रद्द किया हैं। सुरक्षा की दृष्टि से तो यह उचित कदम है। लेकिन एक सच ये भी है कि कांग्रेस और राहुल गांधी को स्थानीय जनता में अपनी राजनैतिक जमीन को लेकर आश्वस्त नहीं हैं। देवभूमि की जनता उनके सनातन विरोधी बयानों से नाराज है और वीरभूम के पूर्व सैनिकों में भी सेना के अपमान, खासकर पौड़ी के स्वर्गीय जनरल रावत को गुंडा बताने से बहुत रोष में हैं। उन्हें एहसास हो गया था कि पौड़ी और अल्मोड़ा में उनके दौरे को लेकर जनता में कोई उत्साह नहीं है, विशेषकर पूर्व सैनिकों में। शायद एक बड़ी वजह ये भी है कि वे पहाड़ पर मौसम खराब होने की आड़ में शेष दौरा भी छोड़ कर भागने की। यदि ऊपर नहीं जा पाते तो मैदान में ही जनता से बात करते और अगले दिन देहरादून में कार्यकर्ताओं से संवाद करते। लेकिन सभी जानते हैं कि कांग्रेसी युवराज के लिए अन्य दौरों की तरह ये भी एक औपचारिकता थी। जिस मौसम खराबी का मौका ताड़ कर वे तत्काल पलायन कर गए। साथ ही तंज कसा कि भाजपा को तो शुक्र है कि चुनाव पास नहीं हैं अन्यथा इस सबके लिए वे सरकार को ही जिम्मेदार ठहराते । जैसा पूर्व में कई चुनावों के दौरान कांग्रेस और इंडी गठबंधन के नेता कर चुके हैं।

 

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, यूं तो देवभूमि अपने संस्कारों के अनुसार आने वाले प्रत्येक व्यक्ति का स्वागत करता है लेकिन ऐसा कोई कारण भी नहीं था कि उत्तराखंड के लोग राहुल का इतजार करें। वो दौरा रद्द होने के बाद आज कह रहे हैं कि राज्यवासियों के सुख दुख, राज्य के आर्थिक सामाजिक और भविष्य के विषयों पर चर्चा की बात कर रहे हैं। जबकि सच यह कि उन्होंने कोई भी मौका देवभूमि की छवि खराब करने और सनातन के अपमान का नहीं छोड़ा। चाहे केदारनाथ समेत पावन धामों की प्रतिष्ठा पर भ्रम और झूठ फैलाना हो, चाहे यूसीसी लागू करने और डेमोग्राफी परिवर्तन पर लगाम लगाने के प्रयासों का विरोध हो, चाहे कानून व्यवस्था पर सफेद झूठ बोलकर अफवाह फैलाना हो। इतना ही नहीं सैनिकों और सनातन का जितना अपमान राहुल और उनके दोस्तों ने किया है उतना तो कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। उसपर उत्तराखंड तो देवभूमि है, वीर सैनिकों की भूमि है, ऐसे में कोई क्यों राजनैतिक एजेंडे लेकर पहुंचने वालों का इंतजार करता। जिस तरह कार्यक्रम से लेकर ट्वीट तक उनके द्वारा कोटद्वार में मोहम्मद दीपक के जिम जाने का जिक्र किया गया। वो साफ़ इशारा करता है कि उन्हें सबसे अधिक वहां नहीं जाने का है क्यूँकि तुष्टिकरण का संदेश देने का उन्हें एक मौका और नहीं मिला। वो भी तब जब वे और तमाम उनके नेता पहले ही मुहम्मद दीपक से कई बार मिल चुके हैं। इस तरह का व्यवहार कहीं न कहीं देवभूमि मे धर्मांतरण की प्रवृति को बढ़ावा देने जैसा है, जिसे यहां की जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करने वाली है।

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